Shriramshantay Organic Farming Research and Training Centre Kota: Advisory
State Level Advisory
सप्तधान्यंकुर - (सात अनाजों को अंकुरित कर के बनाया गया ज्यूस)उद्देश्य :- उत्पादन की मात्रा एवं गुणवत्ता वृद्धि हेतु ।विधि :- बुवाई के 70 दिन बाद या अनाज की बालियों में दाने की दूधिया अवस्था में एवं छोटी फलियां बनने की अवस्था, फूलों में कलीयां निकलने की अवस्था में सप्तधान्यंकुर ज्यूस बनाकर छिड़काव करें। इसके लिए तिल (काले या सफेद कोई भी), मूंग, उड़द, लोबिया, अरहर / तुअर, मसूर, गैहूँ, चने प्रत्येक 100-100 ग्राम ले। सबसे पहले दिन एक कटौरी में तिल भिगो दे, दूसरे दिन उपरोक्त शेष बीजों को रात भर के लिए पानी में भिगो दे। तीसरे दिन सातों प्रकार के बीजों को पानी से निकालकर एक कपड़े में खाली कर के पोटली बनाकर के टांग दे व पानी को सुरक्षित रख दें व अगले दिन घोल में मिला दें। फिर सभी बीजों को अंकुरित होने के उपरान्त पिसकर चटनी बना दे। उसके बाद 10 लीटर गौमूत्र व गुड़ 250 ग्राम मिला लें। 200 लीटर पानी में मिलाकर दो घण्टे के लिए बोरी या कपड़े से ढक कर रख दे उसके बाद छानकर फसल पर छिड़काव करें। (इस घोल को 48 घण्टे के भीतर उपयोग करें।